• slider image 1
  • slider image 1
  • slider image 1
  • slider image 1
image 1 image 1 image 1 image 1

About Us

Sai Ayusham Ayurvedic Clinic Ewm Pancha Kram Center

Ayurveda is the most ancient and most effective form of medical treatment. Sai Ayusham Ayurvedic Clinic Mission is to help & cure people with Ayurvedic Treatment & Therapies for continuous & sustainable healthy living & lifestyle. To prevent people from undergoing, costly treatments & having side effects. We offers health services and educational experiences oriented toward helping to restore the bodies natural intelligence in a holistic way. Our fully licensed or certified healthcare professionals utilize the best ancient and modern Western approaches to bring balance. We are leading Ayurvedic clinic for Ayurvedic consultations and treatments (e.g., abhyanga, swedana, shirodhara, facials); massage therapy (e.g. therapeutic/deep tissue, Swedish/relaxation, hot stone therapy, chair massage); and psychotherapy services.


Specialty:-  बंध्यत्व (बाँझपन) , स्त्री रोग , पुरुष रोग , केश रोग , शिशु रोग


Quality Policy:- भारतीय चिकित्सा के मानकों के अनुरूप स्वयं के द्वारा निर्मित औषधि एवं उच्च गुणवक्ता वाली औषधिओ का उपयोग किया जाता है |

Vision:- Ayurveda is a science & art of appropriate living that helps to achieve long and healthy life. Sai Ayusham Ayurvedic Clinic guide every individual in the prevention of disease and long term maintenance of health. 

Mission:- We Provide a good Ayurvedic treatment that helps to achieve a balanced state of body.

Sell & Service

Sai Ayusham Infertility Center

Female  Diseases (स्त्री रोग)

  • Infertility (बंध्यत्व)
  • Overy Cyst (Overy में गाँठ होना )
  • Fallopian tube blockege 
  • Uterine Fibriod
  • Small Overy (अंडाणु का आकर छोटा होना )
  • Abortion (बार-बार गर्भपात होना )
  • Vaginitis (योनि शोध )
  • Metrorrhagia (रक्त प्रदर)
  • Leucorrhoea (श्वेत प्रदर )
  • Soma roga (सोम रोग )
  • Oligomenorrhoea (अल्प आर्तव)
  • Amenarrhoea (नष्ट आर्तव)
  • Dysmenarrhoea (कष्ट आर्तव)
  • Hypomenarrhoea (हीनार्तव)
  • Breast Diseases (स्तन रोग)

Male  Diseases (पुरुष रोग)

  • Weakness (कमजोरी होना)
  • Azoospermia 
  • Night Discharge (स्वप्न दोष)
  • Lack of Sex Power
  • Erectile DysFunction
  • Buring Micturition (पेशाब में जलन होना)
  • OligoSpermiac (शुक्राणुओ की संख्या कम होना)
  • धातु जाना (पेशाब के रास्ते से)

***जब  आयुर्वेद है तो टेस्ट टूब बेबी करवाने की कोई  आवश्यकता  नही है***


गर्भ संस्कार 

गर्भ संस्कार  का  मतलब  Education  in the Womb यानि गर्भ में ही शिशु को  संस्कार  देना जिस  प्रकार  से अभिमन्यु  ने चक्रब्यूह की रचना  का ज्ञान  गर्भ में ही प्राप्त  कर लिया  था 
गर्भ  संस्कार  के अंतर्गत  गर्भवती  महिला  को 
  • आर्युवेदिक मेडिसिन 
  • पंच कर्म 
  • संगीत  
  • दिनचर्या  
  • खानपान  
  • ग्रंथो का अध्यन  आदि प्रकारों  से  संस्कारित  किया जाता है 
गर्भ संस्कार   के लाभ
  • शिशु   पूर्ण  रूप से  अच्छा  Emotionally ,मानिसक  शारीरिक  व्  आत्मिक   रूप  से Healthy  होता है 
  • प्रतिरोधक क्षमता ( Immunity Power) अधिक होती है आदि




Pimples & Skin Problems (मुंहासा और त्वचा की समस्याएं)

  • Pimples
  • Eczema
  • Hypersensivity
  • Hyperpigmentation

Hair Problems (बालों की समस्याएं)

  • Hair Fall
  • Dandruff
  • Dry Hair
  • Split Hair
  • Alopecia
  • Greying Hair
  • Whitening of Hair
Specialized for Joint Problems (जोड़ो की समस्याएं)

  • Joint pain (जोड़ों का दर्द)
  • Arthritis (संधिवात)
  • Rheumatoid Arthritis (आमवात)
  • Gout (वातरक्त)
  • Paralysis (लकवा)
  • Ankylosing Spondylitis
  • Sciatica (साईटिका)
  • Slip Disc
  • Back Ache (कमर दर्द)
  • Sprain
  • Frozen Shoulder
  • Myopathies
  • Psoriatic Arthritis
  • Sclerosis
  • Osteoporosis
  • Pain After Accident
  • Osteomalacia
Cholesterol Problems (कोलेस्ट्रॉल समस्याएं)

Chronic Fever (पुराना बुखार )

Piles (बवासीर)

Fistula-in-Ano (भगन्दर)

worms (कृमि)

Urinary Obstruction (मूत्र रुकावट)

Cough (खांसी)

Jaundice (पीलिया)

Mental Disorder (मनोविकार)

Eye Problems (आंख की समस्याओं)

Bleeding Gums (मसूड़ों से खून बहना)

Allergy (एलर्जी)

Obesity (मोटापा)

Weight Gain (वजन बढ़ना)

Acidity Problems (अम्लरोग)

Headache/Migraine (सिरदर्द / आधा सिरदर्द)

Diabetes (मधुमेह)

Asthma (दमा)

Psoriasis (सोरायसिस)

Addiction (नशा मुक्ति)

Sinusitis

Bronchitis

Thyroid

High Blood Pressure

Low Blood Pressure

Burning Micturition (मूत्रदाह)

Height (हाईट बढ़ाना)

Urinary Stone (पथरी)

Anemia (खून की कमी होना)

Gastric Ulcer (पेट के छाले)

Typhoid Fever (टाइफाईड)

   “आयुर्वेद एवं पंचकर्म पद्धति से सफल संपूर्ण चिकित्सा”

पंचकर्म क्या है ? जानें  :-
  • वमन : विशिष्ठ दवाईयों वाला घी खिलाकर दवाईयां देकर शरीर के अनचाहें दोषों को बाहर निकालना
  • विरेचन : दवाईयों द्वारा दोषों को गुदा के रास्ते बाहर निकालना/जुलाब करवाना ।
  • बस्ती : निरूहबस्ती- गुदे के रास्ते से औषधी कषायों को शरीर में प्रवेश कराके वात एवं पक्काशय को साफ करवाना ।
  • अनुवासन : औषधी सिद्ध तेलों को गुदा मार्ग से देना है अनुवासन बस्ती ।
  • रक्तमोक्षण : जलौका, निउल आदि की सहायता से शरीर में से खराब रक्त निकालना । 
  • नस्य : गले के ऊपर के विकारों के लिए नाक में दवाई डालना । 
  • स्नेहन : विशिष्ठ घी/तेलों से मसाज करना ।
  • स्वेदन : दवाईयों की भाप से, नमक, चावल आदि से विशिष्ठ पद्धति से सेंकना । 
  • नेत्र तर्पण : दवाईयों वाला घी/दुध को उडद के आटे के सहारे से आँंखों में कुछ समय रखना । 
  • अग्निकर्म : स्वर्ण, पंचधातु, मिट्टी की सलई से चटका देना । 
  • शिरोधारा : दोनों आँंखों के बीच भूमध्य पर औषधी सिद्ध घी, तेल, दूध, छाछ आदि को धीरे-धीरे छोड़ना ।
  • शिरोबस्ती : सिर पर चमड़े का टोपा बांधकर उसमें दवाईयों का घी, तेल भरकर कुछ देर रखा जाता है ।
  • उत्तरबस्ती : गर्भाशय , मूत्राशय के विकारों के लिए गर्भाशय , मूत्राशय में दवाई छोड़ना ।
  • धावन : स्त्रियों के प्रदर ¼सफेद पानी½ एवं रज:काल संबंधी बीमारियों के लिए ।
पंचकर्म केवल पांच कर्म नहीं है इसमें प्रमुख 5 कर्म है सो कहलाता है पंचकर्म । पंचकर्म उपचारों से असाध्य रोग भी पूर्णत: दूर होते है, पर वे पुन: न हो इसलिए की जाती है रसायन और वाजीकरण चिकित्सा 

रसायन चिकित्सा : शरीर में सब धातुओं को समस्थिति में लाकर व्याधि प्रतिकार शक्ति बढ़नाा है रसायन चिकित्सा

वाजीकरण चिकित्सा : स्त्री एवं पुरूषों में दूषित शुक्र के लिए की जाने वाली चिकित्सा ।


स्वर्णबिन्दु  प्राशन संस्कार 

हर माह के पुष्य नक्षत्र के दिन शिशु को सुवर्ण युक्त आयुर्वेदिक दवाइयों को मधु के साथ दिया जाता है |

स्वर्णबिन्दु  प्राशन संस्कार लाभ 

  • मेधा (Mental ability )

  • मंगलकारक (Brings Positive attitude)

  • गृह बाधा नाशक (Voids Away Associated Evils)

  • वृष्य (Aphrodisiac)

  • वर्ण्य (Good complexion )

  • बल (Physical strength )

  • आयु वर्धक (Prolongs lifespan)

  • अग्नि वर्धक (Digestive Power)

  • पंचइंद्रिय वर्धक (Good for Sensory organs)

  • यह क्रोध attention deficiency, bed wetting psychosomatic Problems. learning difficulties hyperactivity, delayed milestone को काम करता है 

  • Increases Immunity Against Unwanted Infection 
आवश्यक शिशु चर्या 

प्रातः सुबह उठना - ब्रम्ह मुहर्त प्रातः सूर्य उदय से १५ मिनिट पूर्व तक का माना गया है | इस मुहर्त में उठने से बॉडी ऑक्सीजन लेवल अच्छा रहता है जिससे हमारी स्मृति व् प्रतिरोधक क्षमता ज्यादा अच्छी रहती है |

दन्त धावन - वर्तमान समय में प्रचलन में मधुर रस प्रधान टूथपेस्ट उपयोग किया जाते है | लेकिन आयुर्वेद में कटु तिक्तरस का उपयोग दन्त धावन हेतु बताया गया है जैसे - नीम , बबूल आदि | अगर हो सके तो हफ्ते में एक बार हमे इन द्रव्यों का उपयोग करना चाहिए जिससे दन्त व् ओरल कैविटी ज्यादा स्वस्थ्य रहती है |

जिह्वा प्रक्षालन - नियमित करने से डायजेस्टिव सिस्टम स्वस्थ्य रहता है |

नस्य - आयुर्वेद में प्रातः स्कूल जाने पर पहले नाक में दो-दो बूंद तिल का तेल , घृत ,सरसों का तेल आदि डालने से सामान्य एलर्जिक इन्फेक्शन से बचाव होता है व् पिट्यूटरी ग्लैण्ड उत्तेजित होता है जिससे हमारी हाइट व् अन्य शारीरिक ग्रोथ का सामान्य विकास होता है |

अंजन - यथा संभव आँखों में प्रसादन अंजन का उपयोग कर हम समय से पूर्व दृष्टि कमजोर होने से बचाव कर सकते है व् आँखों को लम्बी उम्र तक स्वस्थ्य रख सकते है | 





Gallery

Contact Us

Dr.C.S.Japale & Dr.K.K.Japale
Vrindavan Colony, purane rojgar karyalaya ke samne sanawad road, Khargone M.P.
Vrindavan Colony
9826338139 , 9754321219 , 8517851301
saiayusham @gmail.com
9:00 AM to 8:00 PM
Sunday